हेतवः विविधप्रवृत्तीनां माध्यमेन संस्कृतभाषायां श्रवणं भाषणं पठनं लेखनं च इति चतुर्ष कौशलेषु सामर्थ्यं प्राप्स्यन्ति । दैनिकजीवने स्वव्यवहारे संस्कृतभाषायाः उपयोगं कर्तुं सामर्थ्यं प्राप्स्यन्ति । संस्कृतभाषायां नैपुण्यं प्राप्तुं सक्षमाः भवेयुः । संस्कृतभाषायाः प्रभावपूर्णप्रयोगार्थं विविधयुक्तिप्रयुक्तीनां प्रयोगं कुर्युः । 1. विश्वभाषा संस्कृतम् सरलभाषा संस्कृतं सरसभाषा संस्कृतम् । सरस-सरल-मनोज-मङ्गल-देवभाषा संस्कृतम् ॥ मधुरभाषा संस्कृतं मृदुलभाषा संस्कृतम् । मृदुल-मधुर-मनोह-रामृत तुल्यभाषा संस्कृतम् ॥ (अमृत) तुल्यभाषा संस्कृतम् ॥ देवभाषा सस्कृतं वेदभाषा संस्कृतम् । भेद-भाव-विनाशकं खलु , दिव्यभाषा संस्कृतम् ।। अमृतभाषा संस्कृतम् , अतुलभाषा संस्कृतम् । सुकृति-जन-हृदि परिलसितशुभवरदभाषा संस्कृतम् ॥ भुवनभाषा संस्कृतं , भवनभाषा संस्कृतम् । भरत-भुवि परि-लसित , काव्य-मनोज्ञ-भाषा संस्कृतम् ।। शस्त्रभाषा संस्कृतं , शास्त्रभाषा संस्कृतम् । शस्...
युनिट 1 : श्रवण और लेखन कौशल आधारित प्रवृतियाँ। 1.1 https://youtu.be/IPNVwstst7s , https://youtu.be/JJKpjtr15wk विडिओ क्लिप सुनकर काव्य में प्रस्तुत विचारों पर चिंतनकीजिए। 1) ' गीत फरोश ' - भवानीप्रसाद मिश्र 2) व्याल पर विजय - रामधारी सिंह ' दिनकर ' यूट्यूब के चैनल हिंदी कविता मैं भवानी प्रसाद मिश्रा और रामधारी सिंह ' दिनकर ' की कविताओं का पठान दिया गया है मैंने दोनों वीडियो को अच्छी तरह से देखा और मेरी समझ के अनुसार यहां पर उनके बारे में उन कविता के बारे में मेरे विचार प्रगट कर रहा हूं। भवानी प्रसाद मिश्र भवानी प्रसाद मिश्र (जन्म: २९ मार्च १९१४ - मृत्यु: २० फ़रवरी १९८५ ) हिन्दी के प्रसिद्ध कवि तथा गांधीवादी विचारक थे। वे ' दूसरा सप्तक ' के प्रथम कवि हैं। गांधी-दर्शन का प्रभाव तथा उसकी झलक उनकी कविताओं में स्पष्ट देखी जा सकती है। उनका प्रथम संग्रह ' गीत-फ़रोश ' अपनी नई शैली , नई उद्भावनाओं और नये पाठ-प्रवाह के कारण अत...